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प्रबंधन विभाग

परिचय

       तकनीकी शिक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के उद्योग एवं कार्य संस्थाओं हेतु प्रबंध शिक्षा, प्रशिक्षण एवं शोध हेतु उत्कृष्ट केन्द्र।  

  • दूरगामी उददेश्य
  • मांग आधारित प्रमाण पत्र से पी.एचडी. प्रबंध शिक्षा कार्यक्रमों की संरचना करना एवं क्रियांवित करना।
  • अन्तर्राष्ट्रीय प्रबंध संस्थाओं के साथ सहकार्य सहयोग एवं संबंध स्थापित करना।
  • प्रबंध शिक्षा, प्रशिक्षण एवं शोध कार्यक्रमों हेतु पाठ्‌यक्रम तैयार करना।
  • प्रबंध शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों हेतु पठ्‌न-पाठ्‌न की सामग्री तैयार करना।
  • प्रबंध क्षेत्र में गुणवत्ता अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देना।
  • प्रबंध नवाचार की विभिन्न प्रणालियों एवं संस्थाओं में लागू करवाने में सहयोग करना।
  • प्रबंध परामर्श के माध्यम से राशि प्राप्त करना।
  • विभिन्न प्रणालियों एवं संस्थाओं के लिए नीतिगत हस्तक्षेप विकसित करना।
  • विधार्थियों, शोधार्थियों एवं सरोकार समूह से नवाचार करने के लिए प्रकाशन शुरु करना।
  • निपुणता के वांछित स्तर एवं विद्यार्थियों के प्रवेश स्तर को ध्यान में रखकर विषय वस्तु आयोजित करना। विषय-वस्तु को आयोजित करते समय आवश्यक विषय-वस्तु का समावेश करना ।
  • विषय-वस्तु को सरल से कठिन के क्रम में आयोजित करना चाहिए। यह क्रम विधार्थियों के द्रष्टिकोण से निर्धारित करना चाहिए।
  • विषय-वस्तु को ज्ञान से अज्ञान के क्रम में आयोजित करना चाहिए। विधार्थियों को विषय-वस्तु की जानकारी के आाधार पर वह नयी जानकारी का अनुमान लगा सके एवं उनमें इसे जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो सके।
  • विषय-वस्तु को ठोस से अमूर्त क्रम में आयोजित करे। विधार्थियों को ठोस जानकारी पहले दी जानी चाहिए ताकि वे अमूर्त परिकल्पना को समझ सके। अमूर्त परिकल्पना से संबंधित जानकारी एक से अधिक माध्यम से देनी चाहिए ताकि विधार्थी परिकल्पना का द्रश्य तैयार कर सके।
  • विषय-वस्तु को सीखने की एक पूर्ण इकाई में प्रदान करिये। ऐसा करने से प्रत्येक सीखने की इकाई के पश्चात विषय दिया जा सकता है, सीखने का मूल्यांकन किया सकता है, विधार्थियों की शंकाओं का समाधान किया जा सकता है।
  • विधार्थी विकसित की जाने वाली निपुणता से संबंधित ज्ञान, कौशल एवं अभिकृति पूर्व  से ही रखते हो ऐसी परिस्थिति में उनके स्तर से आगे सीखने की योजना बनायी जा सकती है। ऐसा करने से समय एवं प्रयास की बचत होगी। यदि विधार्थियों का समूह मिश्रित प्रकार का है तो परिचर्चा के माध्यम से सभी विधार्थियों को इस निश्चित स्तर पर ले जाना चाहिए एवं तत्पश्चात आगे सीखने की योजना बनाना चाहिए।
  • विषय-वस्तु को आयोजित करना
  • निपुणता के निर्धारित स्तर को विकसित करने के लिए विषय-वस्तु तार्किक रूप से आयोजित करना चाहिए। विषय-वस्तु का आयोजन सीखने के सिद्धांतो को ध्यान में रखकर करना चाहिएं नये प्राध्यापको को विषय-वस्तु आयोजित करने हेतु विषय-वस्तु विश्लेषण एवं विषय-वस्तु चित्रण का अभ्यास करना चाहिए। विधार्थियों में निपुणता का विकास करने के लिए विषय-वस्तु के आयोजन हेतु प्राध्यापकों को निम्नलिखित मार्गदर्शक बिन्दुओं का ध्यान रखना चाहिए :-
  • विषय-वस्तु के माध्यम से निपुणता का विकास करने महत्व को लीखिये। पेशेवर जीवन में निपुणता का संबंध पेशेवर भूमिका से जोड़िये।
  • अन्य निपुणताएं जो सीखी जा चुकी है एवं सीखी जाना है का संबंध विषय-वस्तु से जोड़िये।
  • विभिन्न ग्राहको हेतु प्रबंध शिक्षा शुरु करने हेतु आवश्यकता विश्लेषण शोध कार्य करना।
  • समुदाय, उद्योग एवं कार्यक्षेत्र संस्थाओं को प्रबंध शिक्षा प्रदान करना।
managment

प्रबंध विभाग की मूल योग्यता:

नेतृत्व विकास, योजनाबद्ध बदलाव एवं नवाचार, परियोजना प्रबंध, भविष्य  द्रश्य तैयार करना एवं रणनीति आधारित योजना बनाना, पठ्‌न-पाठन सामग्री जैसे अभ्यास प्रकरण, शेक्षिक खेल, प्रतिरुप, प्रकरण बैक, पुस्तक इत्यादि तैयार करना। विभिन्न प्रणालियों जैसे गुणवत्ता प्रबंधन, सम्पूर्ण गुणता, सिक्स-सिगमा, गुणवत्ता वृत्त, संस्था परिक्षण, मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण, कार्य निष्पादन मूल्यांकन, शैक्षिक उत्पाद एवं कार्यक्रमों को बेचना, संस्था निर्माण, संस्था विकास नीति निर्माण एवं विश्लेषण इत्यादि।

प्रबंधन  विभाग 
Dr.pdubey

डॉ. पराग दुबे

प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष

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मुख्य कार्य क्षेत्र:

डॉ. आर.बी. शिवगुंण्डे

प्राध्यापक

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मुख्य कार्य क्षेत्र:

  • गुणवत्ता प्रबंधन टीक्यूएम, सिक्स सिग्मा और QC 
  •  नेतृत्व विकास
  • योजना बनाई परिवर्तन और नवाचारों
  • प्रणाली के विकास, आईबी आयुध डिपो, और विपणन
  • परियोजना प्रबंधन
  • औद्योगिक परामर्श

                               

डॉ. बी.एल. गुप्ता

प्राध्यापक

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 मुख्य कार्य क्षेत्र:

  • मानव संसाधन विकास
  • संगठन निदान, मूल्यांकन एवं प्रामाणिकरण
  • भविष्य दृश्य एवं  रणनीति योजना
  • कार्य निष्पादन एवं संस्था विकास,
  • नीति निर्माण और विश्लेषण
  • परियोजना प्रबंधन

डॉ. आशीष देशपांडे

प्राध्यापक  

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मुख्य कार्य क्षेत्र:

  • कॉर्पोरेट वित्त
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्त
  • जलवायु परिवर्तन परिदृश्य और नीति विश्लेषण
Dr.R.pradhan

डॉ. रोली प्रधान

सहायक प्राध्यापक

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मुख्य कार्य क्षेत्र: