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शिक्षण संसाधन विकास
 

अभी तक भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त तकनीकीशियन स्तर की शिक्षा सामग्री की माँग पारंपरिक शैक्षणिक प्रौद्योगिकियों के संबंध में भी पूर्णतया पूरी नहीं हो पाई है। बहुत से नए प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के आरम्भ हो जाने से इस प्रकार की सामग्री की माँग अत्याधिक बढ़ती जा रही है। रा.त.शि.प्र.अनुसं., भोपाल के मार्गदर्शन में प्रत्येक राज्य में एक शिक्षा संसाधन विकास केन्द्र (शि.सं.वि.के.) (एल.आर.डी.सीज) और पॉलिटेक्‌निकों में शिक्षा संसाधन उपयोग केन्द्र (शि.सं.उ.के. (एलआरयूसीज) स्थापित हो जाने से इस प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराने में संस्थान को कुछ जिम्मेदारी से राहत मिली है। संस्थान ने विविध प्रकार के उभरते विषयों की शिक्षा सामग्री का विकास आरम्भ कर दिया है। यह ऐसे केन्द्रों के संचालन के लिए व्यावसायिकों को तैयार करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है और शिक्षा सामग्री तैयार करने एवं विकसित करने, उनकी उपयुक्तता जाँचने तथा सुधार लाने में उनकी सहायता कर रहा है।

      संस्थान में उच्च प्रोद्योगिकी उदाहरणार्थ कम्प्यूटर आधारित प्रशिक्षण क.आ.प्र. (सीबीटी) पैकेजों और उच्च प्रौद्योगिकी वाले विषयों में शिक्षण प्रशिक्षण हेतु मल्टीमीडिया पैकेजों के प्रयोग से शिक्षा सामग्री के विकास, संस्थागत और कम्पनी का संक्षिप्त परिचय तथा शिक्षकों, प्रशिक्षणार्थियों व छात्रों में सकारात्मक भाव विकसित के बारे में प्रयोग भी किया जा रहा है। भिन्न मा.सं.वि. परियोजनाओं के लिए योग्यता आधारित स्व-अध्ययन मॉड्‌यूल्स विकसित करने के प्रयास को ग्राहकों द्वारा बहुत महत्व दिया गया है।