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संस्थान एक स्वायत्त संस्था है। इसका संचालन मध्यप्रदेश समिति (सोसाइटी) पंजीकरण अधिनियम 1973 के अन्तर्गत भोपाल में पंजीकृत ''राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल सोसाइटी'' द्वारा होता है। संचालक मण्डल संस्थान का संचालन करता है, जो सामान्य निरीक्षण, मार्गदर्शन तथा नियत कार्यों को कार्यान्वित करने का उत्तरदायी होता है। संचालक मण्डल में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्‌, मानव संसाधन विकास एवं वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधिगण, क्षेत्र के राज्यों के तकनीकी शिक्षा के निदेशकगण, तकनीकी विश्वविद्यालय भोपाल के प्रतिनिधि, तकनीकी शिक्षा/उद्योग से जुडे़ गैर-सरकारी सदस्यगण तथा संकाय प्रतिनिधिगण होते हैं। संचालक मण्डल का अध्यक्ष केन्द्र सरकार द्वारा पाँच वर्ष के लिए  नामित किया जाता है। संस्था का निदेशक सर्वोच्च कार्यकारी तथा परिषद्‌ एवं संचालक मण्डल का पदेन सचिव भी होता है। संस्था का कार्य संस्था ज्ञापन तथा रा.त.शि.प्र.अनु.सं. भोपाल परिषद के नियमों एवं विनियमों के अनुसार पूरा किया जाता है.

 

 

 संरचना अन्तर्गत अभियांत्रिकी/विज्ञान तथा शिक्षा विभाग, शिक्षा-प्रौद्योगिकी केन्द्र, सामाजिक विकास केन्द्र है। जिनका संचालन विभागाध्यक्ष/केन्द्राध्यक्ष द्वारा किया जाता है और जो निदेशक के प्रति उत्तरदायी होते हैं। वरिष्ठ प्राध्यापकों (प्रभागाध्यक्षों/केन्द्राध्यक्षों) की आंतरिक सलाहकारी समिति शैक्षिक मामलों में निदेशक को सहयोग देती है। इसके अतिरिक्त विविध समितियां विभिन्न प्रशासनिक व प्रबंधकीय कार्यों का निष्पादन करके संस्था के निर्बाध संचालन में प्रबंधन को सहयोग देती हैं।

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इस संगठनात्मक ढाँचे की कार्यप्रणाली कार्यदल तथा परियोजना दल आधारित दृष्टिकोण पर निर्भर होती है। संरचना ग्राहकों की विविध परिवर्तनशील मांगों को पूरा करने और अपनी वृद्धि एवं विकास हेतु अपने आपमें गतिकता बनाए रखने के लिए अत्यंत अनुकूल तथा लचीली है। यह तकनीकी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकताओं, उद्योगों में प्रौद्योगिकी विकास और समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति अतिसंवेदनशील हैं।। यह कार्यदल, व्यावसायिकता तथा संकाय एवं कर्मचारियों में योग्यता में निरंतर सुधार पर ध्यान केन्द्रित करता है। किसी एक समय पर हरेक संकाय सामान्यतः दो से तीन कार्यदल में कार्य कर सकता है।

      इस संरचना में स्वायत्तता एवं उत्तरदायिता का मूलतत्व अन्तर्निहित है। जब-जब आवश्यकता होती है, विशेषज्ञता के भिन्न क्षेत्रों से संसाधनों को एकत्रित करके संरचना की कमी पूरी की जाती है। कार्यदलों के निर्विध्न निष्पादन के लिए आवश्यक सहायता व समन्वय प्रदान करने की दृष्टि से सहायक समितियाँ गठित की जाती हैं और वास्तव में परियोजना प्रबन्धन दल का प्रतिनिधित्व करती है।