भारत वह पुण्यभूमि है जहाँ हजारों वर्षों से ज्ञान की अविरल धारा प्रवाहित होती रही है। आध्यात्मिक विद्या, आयुष विद्या, विज्ञान, गणित, योग, दर्शन, कला-कौशल एवं विभिन्न विद्याएं इत्यादि मानवता के लिए भारत की अमूल्य देन हैं। परंतु पश्चिमी अंधानुकरण की अंधी दौड़ में हम कहीं अपनी इस विरासत को भूलते जा रहे हैं। इसी गहरी चिंता और सुदृढ़ संकल्प के साथ, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), भोपाल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है — भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग (Department of Indian Knowledge System) की स्थापना।
भारतीय ज्ञान परंपरा — एक अनमोल धरोहर प्राचीन काल में नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, उज्जैयिनी, वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों में विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी ज्ञान पिपासा लेकर आते थे। आर्यभट्ट ने शून्य और दशमलव की खोज की, चरक ने चिकित्सा को नई ऊँचाइयाँ दीं, बौधायन ने ज्यामिति के सिद्धांत स्थापित किए, महर्षि कणाद ने अणु की संकल्पना देते हुए इस सृष्टि की व्याख्या की — ये सब भारतीय ज्ञान परंपरा की अटूट कड़ियाँ हैं। इस परंपरा में केवल शास्त्र ही नहीं, जीवन जीने की समग्र दृष्टि निहित है। आज जब विश्व पुनः प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान, योग और धारणीय विकास की ओर देख रहा है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत का प्राचीन ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक और जीवंत है।
NITTTR भोपाल सदैव तकनीकी शिक्षा में नवाचार और गुणवत्ता का अग्रदूत रहा है। इसी क्रम में संस्थान ने भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग की स्थापना करके यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा और भारतीय चिंतन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। यह विभाग न केवल एक शैक्षणिक इकाई है, अपितु यह भारत के उस स्वर्णिम अतीत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का एक सेतु है। इस विभाग की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस मूल उद्देश्य के अनुरूप है, जिसमें भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में सम्मिलित करने पर बल दिया गया है। संस्थान का यह कदम न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है।
इस विभाग के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा विषय में दो महत्वाकांक्षी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं:
स्नातक पाठ्यक्रम (Bachelor's Programme in Indian Knowledge System) B.S.
यह पाठ्यक्रम उन युवाओं के लिए है जो भारतीय वाङ्मय, दर्शन, विज्ञान एवं तकनीकी, गणित और संस्कृति की गहरी समझ विकसित करना चाहते हैं। पाठ्यक्रम में वेद, उपनिषद, भारतीय तर्कशास्त्र, आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत, भारतीय गणित एवं खगोल विज्ञान, और पर्यावरण के प्रति भारतीय दृष्टिकोण जैसे विषय सम्मिलित होंगे। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि उन्हें शिक्षा, अनुसंधान, सांस्कृतिक प्रबंधन और नीति-निर्माण के क्षेत्रों में उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करेगा।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (Master's Programme in Indian Knowledge System) M.S.
स्नातकोत्तर स्तर पर यह पाठ्यक्रम शोध और विशेषज्ञता की दिशा में अग्रसर करता है। इसमें भारतीय ज्ञान के विभिन्न पक्षों — जैसे धर्म, दर्शन, विज्ञान एवं तकनीकी, वास्तु, ज्योतिष, खगोल, स्थापत्य कला, नृत्य कला, संगीत कला, लोक ज्ञान और पारंपरिक तकनीक — का गहन अध्ययन होगा। यह पाठ्यक्रम अकादमिक शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और उन सभी के लिए उपयुक्त है जो भारतीय ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का स्वप्न देखते हैं।
आज का युग वैश्वीकरण का युग है, किंतु वैश्वीकरण में जो राष्ट्र अपनी पहचान, अपनी जड़ें और अपनी विशिष्टता को जीवित रख सकता है, वही दीर्घकाल तक श्रेष्ठ बना रह सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के पाठ्यक्रम आपको वह दृष्टि देंगे जिससे आप न केवल एक कुशल पेशेवर बनेंगे, बल्कि एक जागरूक, संस्कारवान और राष्ट्रभक्त नागरिक भी बनेंगे।
राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), भोपाल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा सन् 1965 में स्थापित विश्वविद्यालय समतुल्य एक प्रमुख संस्थान है, जो शिक्षक प्रशिक्षण और समग्र तकनीकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्यरत है।
NITTTR भोपाल में भारतीय ज्ञान परंपरा पर निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाती है, जिनमें विशेष रूप से उच्च शिक्षा विभाग के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। NITTTR भोपाल का यह IKS शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के अनुरूप है, जो भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ने पर बल देती है। यह कार्यक्रम शिक्षकों को न केवल तकनीकी दक्षता, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना से भी समृद्ध करता है — जिससे वे वास्तव में एक आदर्श गुरु की भूमिका निभा सकें।